नई दिल्ली: असम में NRC डाटा के फाइनल ड्राफ्ट की खबर ने दो दिन से देश में कोहराम मचा रखा है. 40 लाख लोग लिस्ट से गायब हैं. सरकार कह रही है कि जिनके नाम लिस्ट से बाहर हैं वो देश के नागरिक हैं ही नहीं. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने NRC लिस्ट को देशभक्ति से जोड़ते हुए कहा कि बाहरी हमारे लोगों की नौकरी खा रहे हैं, क्या देश के लोगों का मौलिक अधिकार नहीं है? ये भी कि बाहरी लोग देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं और बीजेपी सरकार ने इन्हें छांटने की हिम्मत दिखाई.

समस्या अब ये है कि पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार का नाम भी लिस्ट से गायब है. यही नहीं एआईयूडीएफ के पूर्व विधायक का नाम भी लिस्ट से गायब है. इसके अलावा बहुत से ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं जिनका नाम लिस्ट में नहीं है. पूर्व विधायक अतऊर रहमान के मुताबिक उनके पूरे परिवार का नाम लिस्ट में शामिल है. उनके पिता का नाम भी लिस्ट में शामिल है लेकिन उनका नाम लिस्ट में शामिल नहीं है.

अतऊर रहमान ने कहा कि या तो ये किसी सरकारी अफसर की लापरवाही की वजह से हुआ है या फिर ये साजिश है. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वो जिला जज के पास गए और उन्होंने सारे कागजात दिखाए. उनके मुताबिक जिला जज ने भरोसा दिलाया है कि वो इस बात की जांच करेंगे कि आखिर ये चूक कहां से हुई? अभयापुर से वर्तमान विधायक अनंत कुमार मालो का नाम भी लिस्ट से गायब है.

असम में एनआरसी का फाइनल ड्रॉफ्ट जारी, 40 लाख लोगों की नागरिकता अवैध

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में सांसद ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूने की कोशिश, ऐसा था PM का रिएक्शन