नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली में महिला पत्रकारों से मुलाकात के दौरान सवालों के जवाब में कहा कि बीजेपी और नरेंद्र मोदी को हराने के लिए कांग्रेस किसी महिला प्रधानमंत्री के लिए भी तैयार है. सरसरी तौर पर इसे टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रधानमंत्री कैंडिडेट बनने पर कांग्रेस के रुख का इशारा समझा गया लेकिन ये इशारा राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी के लिए भी तो हो सकता है. राहुल गांधी ने तो सिर्फ इतना ही कहा कि वो महिला प्रधानमंत्री को समर्थन देने के लिए तैयार हैं. ये महिला कांग्रेस से बाहर ही नहीं, कांग्रेस के अंदर से भी हो सकती हैं.

राहुल ने महिला प्रधानमंत्री को समर्थन के अलावा कुछ नहीं कहा जिससे महिला प्रधानमंत्री को समर्थन के दायरे में कांग्रेस के अंदर से लेकर बाहर तक की तमाम भाजपा विरोधी पार्टियों के नेता आते हैं और उनमें प्रियंका गांधी भी गिनी जा सकती हैं जो अब तक सिर्फ सोनिया गांधी की रायबरेली और राहुल गांधी की अमेठी सीट का चुनाव देखती रही हैं. मीडिया में खबर उड़ चुकी है कि रायबरेली सीट से इस बार सोनिया गांधी की जगह पर प्रियंका गांधी भी चुनाव लड़ सकती हैं. महिला पत्रकारों ने राहुल से बातचीत के बाद जो ट्वीट किए उसके मुताबिक राहुल ने पत्रकारों के सारे सवालों के जवाब दिए और कोई भी सवाल खाली नहीं जाने दिया.

राहुल की महिला पत्रकारों से बातचीत में मौजूद रही पत्रकारों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सवाल-जवाब का सार ये रहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ऐसे किसी भी नेता को समर्थन दे सकती है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले एनडीए को हराए और इस खातिर राहुल गांधी पीएम पद पर अपनी दावेदारी को ठंडे बस्ते में डालकर किसी महिला को भी प्रधानमंत्री बनाने के लिए तैयार हैं. राहुल की करीब 100 महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली में मंगलवार को अनौपचारिक मुलाकात के दौरान सवाल-जवाब से निकली ये बातें जब बाहर आईं तो स्वाभाविक तौर पर लोगों ने इसे टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी की संभावनाओं से जोड़कर ये मतलब निकाला कि मोदी और बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए वो ममता या मायावती को भी प्रधानमंत्री बना सकते हैं.

जाहिर तौर पर राज्यों में प्रांतीय दलों की ताकत और कांग्रेस के घटते प्रभाव के बीच राहुल गांधी को पता है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उड़ीसा या पंजाब जैसे राज्यों से वो इतने सांसद जिताकर अब नहीं आ सकती कि दो तिहाई बहुमत के साथ वो अपना प्रधानमंत्री बना ले. एक सूरत ये है कि छोटे-बड़े प्रांतीय दल कांग्रेस को सपोर्ट करें तो राहुल गांधी बनें. दूसरी सूरत ये है कि राहुल गांधी खुद प्रधानमंत्री बनने का प्लान डंप करें और प्रांतीय दलों में सबसे बड़ी पार्टी या सबसे बड़े नेता को प्रधानमंत्री स्वीकार कर लें. देश का जो माहौल है और जो सियासी गणित हैं, उसमें राहुल गांधी के सामने दूसरी सूरत ही बनती दिख रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के तमाम नेता लगातार ये कह रहे हैं कि विपक्षी दलों की एकता सिर्फ एक बात पर है कि मोदी का विरोध करना है लेकिन उनसे कोई उनके पीएम कैंडिडेट का नाम पूछ ले तो प्रधानमंत्री बनने की हसरत रखने वाले उन विपक्षी दलों के कई नेता एक-दूसरे को पूछना तक छोड़ देते हैं. राहुल गांधी का महिला प्रधानमंत्री को समर्थन के लिए तैयार होने का एक संदेश तो यही है कि विपक्षी खेमे में नंबर 2 या नंबर 3, 4 का दर्जा रखने वाली पार्टियों के नेता भी पीएम बनने की तमन्ना जिंदा रख सकते हैं. शर्त बस इतनी है- मोदी और भाजपा को हराओ.

नरेंद्र मोदी और बीजेपी को हराने के लिए ममता बनर्जी या मायावती को भी प्रधानमंत्री बनाने को तैयार राहुल गांधी !

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